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शिवकल्याण राजा

ये हवा ये रात ये चांदनी, 'तेरी इक अदा पे निसार हैं

वो मेरी तरफ यूं चले आं रहे हैं, के अरमान धडकन से टकरा रहें हैं

जो वादा रहा वो निभाना पडेगा..

नजरो से नजरे मिली तो..

का ग बाई भेटलीस अशी अचानक पुन्हा?

वर्तुळ

प्यारी तेरे लोचन...

Back to Square One....